Saturday, September 4, 2010

Shailendra Dubey

Internet Marketing Specialist

अजनबी हूँ मैं

Posted by admin On November - 11 - 2009

अजनबी हूँ मैं
रफ्ता रफ्ता मैं तुम्हें अच्छा लगुंगा
अजनबी हूँ आज कल अपना लगुंगा,
रेत जीतनी प्यास लेकर जब छुओगे,
मैं हूँ तो साहिल पर तुम्हे दरिया लगुंगा…

सल्तनत एहसास की तुमको मिली तो,
मैं तुम्हे जागीर का हिस्सा लगूँगा,
बंद करके आँख जब देखोगे मुझको,
कल सुबह देखा हुआ सपना लगूँगा……….

गर महसूस मुझको दिल से कर सकोगे,
प्यार का बहता हुआ झरना लगूँगा,
मेरे होटों की अजब तासीर है ये,
में हूँ समंदर पर तुम्हें प्यासा लगूँगा…….

मुझको खोकर जिंदगी में जब मिलोगे,
क्या पता मैं उस समय कैसा लगूँगा,
रफ्ता रफ्ता मैं तुम्हे अच्छा लगूँगा,
अजनबी हूँ आज कल अपना लगूँगा……

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